वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर से युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को ईरान पर करीब एक घंटे तक हमले किए। इस कार्रवाई में कई मिसाइल और ड्रोन ठिकाने तबाह हो गए। इस हमले से तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा गंभीर संकट में पड़ गई है। पूरी दुनिया की नजर अब इस इलाके पर टिकी है।
अमेरिकी सेना ने इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह हमला ईरान द्वारा सीजफायर तोड़े जाने के जवाब में किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा कि ईरान की गलती की वजह से ही यह कार्रवाई हुई है। इस हमले के बाद पूरे खाड़ी इलाके में तनाव बढ़ गया है।
अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को ईरान के कई अहम ठिकानों पर एक साथ हमला किया। इस कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन ठिकाने के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध था। इस हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिका ने यह कदम ईरान द्वारा किए गए हमले के बाद उठाया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बयान में कहा कि 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप 'एमवी एवर लवली' पर ड्रोन से हमला किया था। इस हमले के बाद अमेरिका ने कार्रवाई का फैसला किया। CENTCOM ने साफ किया कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस घटना के बाद वहां के हालात और बिगड़ गए हैं।
ईरान का पलटवार और सीजफायर उल्लंघन का आरोप
अमेरिका के हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी पलटवार करने का दावा किया है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने इसे अपनी सेना की जवाबी कार्रवाई बताया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने बातचीत के बीच युद्धविराम का उल्लंघन किया है।
ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि यह युद्धविराम का सीधा उल्लंघन है और इसकी कीमत अमेरिका को चुकानी पड़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका नतीजा अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा। इस बयान से तनाव और बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा पर संकट
होर्मुज स्ट्रेट में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियार से हमला हुआ। इस हमले में जहाज के ब्रिज को भारी नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने 11 हजार नाविकों को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया है। यह कदम समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।
इस हमले के बाद वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि अगर यह तनाव जारी रहा तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है।
लेबनान में तनाव बढ़ा, इजराइल ने दी चेतावनी
अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब लेबनान तक पहुंच गया है। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी इलाके में लोगों को तुरंत अपने घर खाली करने की चेतावनी दी है। इससे वहां के लोगों में दहशत फैल गई है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। इजराइल का कहना है कि यह कदम सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया है।
वहीं, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने साफ कहा है कि इजराइल को लेबनान की पूरी जमीन से बिना शर्त हटना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि उनका संगठन किसी भी हाल में इजराइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा। इस बयान से लेबनान में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंता जता रहा है।
NATO देशों पर ईरान ने साधा निशाना
ईरान ने NATO सदस्य देशों पर भी निशाना साधा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के हमले में कुछ NATO देशों ने भी साथ दिया है। ईरान ने कहा है कि इन देशों को इसका जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। इस बयान से NATO और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
ईरान ने यह भी कहा है कि अगर NATO देशों ने इस मामले में सफाई नहीं दी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इस बयान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे यूरोपीय देशों में भी चिंता बढ़ सकती है। यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है।
अमेरिका-ईरान बातचीत और परमाणु कार्यक्रम पर नजर
हमले और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता पूरी हुई है। दोनों देशों ने चार संयुक्त कमेटियां बनाने पर सहमति जताई है। इन कमेटियों का काम 60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करना होगा। इस बातचीत से शांति की एक उम्मीद जगी है। लेकिन हालिया हमलों ने इस राह में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
दूसरी ओर, IAEA ने कहा है कि उसकी टीम जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करेगी। इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिक गई हैं। रूस ने भी कहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता होता है तो वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका समर्थन करेगा। यह विकास बहुत अहम माना जा रहा है।
तेल बाजार में हलचल और भारत का फैसला
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। भारत जैसे देश जो तेल का बड़ा आयातक है, उन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि अगर यह तनाव जारी रहा तो महंगाई और बढ़ सकती है। इससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा।
वहीं, भारत सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटा दी हैं। इससे आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। भारत ने यह कदम तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति की चेतावनी
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विवादों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन अगर हिंसा जारी रहती है तो जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर समझौते (MOU) के लागू होने को लेकर कोई मतभेद है तो ईरान को फोन पर बातचीत करनी चाहिए। उनका बयान अमेरिका की सख्त रणनीति को दर्शाता है।
वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका शांति चाहता है, लेकिन किसी भी कीमत पर अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उनका यह बयान ईरान के लिए एक साफ संदेश है। जानकारों का मानना है कि अगर दोनों देशों ने बातचीत पर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। पूरी दुनिया अब इस इलाके से आने वाले अगले कदम का इंतजार कर रही है।
इस पूरे मामले में एक बात साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। हालिया हमले, जवाबी कार्रवाई और diplomatie बातचीत सभी एक साथ चल रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे इस तनाव को और बढ़ा रहे हैं। भारत समेत पूरी दुनिया इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। अगले कुछ दिन बहुत अहम होंगे।







