अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून के कई प्रावधानों और शुल्कों के इस्तेमाल पर छूट दे दी है। उन्होंने 16 अक्टूबर को इस संबंध में कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। आदेश में ट्रम्प ने कहा कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
यह कानून रद्द नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस के आदेश के मुताबिक, छूट तब तक लागू रहेगी जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री आगे की कार्रवाई को उचित न मानें। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, व्हाइट हाउस ने आदेश जारी होने के तुरंत बाद यह विस्तार से नहीं बताया कि प्रतिबंधों को रोकना राष्ट्रीय हित में क्यों है।
कानून में 100% तक ड्यूटी का प्रावधान
लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पर ट्रम्प ने 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इसे 16 सितंबर को 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक ड्यूटी लगाई जा सकती थी। यह ड्यूटी उन देशों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर थी, सीधे उनके रूसी तेल आयात पर नहीं।
कानून में रूस से आने वाले सामान पर 500% तक ड्यूटी और रूस से जुड़े व्यक्तियों तथा संस्थाओं पर अन्य प्रतिबंधों के प्रावधान भी थे। ट्रम्प के 16 अक्टूबर के आदेश ने कानून की कई धाराओं के तहत शुल्क और प्रतिबंध लागू करने पर छूट दी। कानून में कुछ कदमों के लिए हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर की समयसीमा थी; तेल और गैस खरीदने वाले देशों के लिए ड्यूटी का प्रावधान 18 अक्टूबर से नई खरीद पर लागू होना था।
भारत के तेल आयात में रूस की बड़ी हिस्सेदारी
अगस्त 2026 में भारत ने रूस से औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल रोजाना खरीदा। Kpler के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, उस महीने भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी ड्यूटी का प्रावधान भारत के लिए अहम था।
पुतिन के साथ डीजल आपूर्ति पर समझौते के बाद आया आदेश
ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति का समझौता होने की बात कही थी। AP के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल देगा और आगे भी खेप भेजेगा। रूस के साथ इस समझौते के एक सप्ताह बाद प्रतिबंधों पर छूट का आदेश आया।

