रीवा / मध्य प्रदेश:कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में विशेष न्यायालय ने तीन दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें एक-एक साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। यह मामला मऊगंज में 190 शीशी नशीली कफ सिरप की बरामदगी से जुड़ा है।
NDPS एक्ट के तहत तीनों को दोषी ठहराया
विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट, जिला रीवा के पीठासीन न्यायाधीश संदीप श्रीवास्तव ने एनडीपीएस प्रकरण क्रमांक 83/2024 में फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों आरोपियों को स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की धारा 8(सी) के उल्लंघन तथा धारा 21(सी) के तहत दोषी ठहराया।
तीनों दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक को एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
मऊगंज में 190 शीशी कफ सिरप के साथ पकड़े गए थे आरोपी
अभियोजन के अनुसार, 9 अप्रैल 2024 को मऊगंज थाना पुलिस को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि चाक मोड़ ओवरब्रिज के पास कुछ लोग सफेद बोरी में अवैध मादक पदार्थ लेकर खड़े हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर मौके पर घेराबंदी की।
इस दौरान एक व्यक्ति मौके से भाग निकला, जबकि दो पुरुष और एक महिला को पुलिस ने पकड़ लिया। तलाशी के दौरान सफेद प्लास्टिक की बोरी से अनोरेक्स कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप की 190 सीलबंद शीशियां बरामद हुईं। प्रत्येक शीशी 100 एमएल की थी।
पुलिस ने दर्ज किया था NDPS एक्ट का मामला
कफ सिरप की बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
बाईपास ओवरब्रिज के पास हुई थी पुलिस कार्रवाई
यह कार्रवाई मऊगंज थाना पुलिस ने चाक मोड़ ओवरब्रिज के पास की थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्धों की घेराबंदी की थी। तलाशी में बरामद 190 शीशियों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन की ओर से सुनील कुमार शर्मा ने की पैरवी
इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार शर्मा ने पैरवी की। अदालत ने सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया और कठोर कारावास की सजा सुनाई।