सोना सिर्फ गहना नहीं, पोर्टफोलियो का ‘कुशन’ भी! WhiteOak Study में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
Gold Investment News: निवेश की दुनिया में सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन एक नई स्टडी ने इसकी भूमिका को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। WhiteOak Capital Mutual Fund की multi-asset allocation study के मुताबिक, पोर्टफोलियो में Gold को Equity और Debt के साथ शामिल करने से जोखिम और रिटर्न के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है। खास बात यह है कि अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में Gold ने कई बार Equity में आई गिरावट के असर को कम करने का काम किया है।
25 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट में अलग-अलग asset classes के प्रदर्शन और उनके बीच correlation का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह है कि निवेशक को हमेशा यह अनुमान लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि अगली बार कौन-सा asset सबसे ज्यादा return देगा। इसके बजाय अलग-अलग व्यवहार वाले assets को एक साथ रखना portfolio risk को संभालने में मदद कर सकता है।
Gold Investment को लेकर क्यों चर्चा में आई यह रिपोर्ट?
WhiteOak Capital की study में Equity, Debt और Gold को एक साथ रखने के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग asset classes बाजार की परिस्थितियों पर एक जैसा प्रतिक्रिया नहीं देती हैं। जब Equity पर दबाव आता है, उस समय Gold का प्रदर्शन अलग दिशा में हो सकता है। यही diversification का मूल फायदा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Gold को केवल safe-haven asset के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। Portfolio construction में इसका इस्तेमाल risk diversification के लिए भी किया जा सकता है।
55% Debt, 25% Equity और 20% Gold का क्या हुआ?
WhiteOak Capital के अध्ययन में एक illustrative portfolio का उदाहरण दिया गया है। इसमें 55% Debt, 25% Equity और 20% Gold का allocation रखा गया। इस portfolio ने अध्ययन की अवधि में औसतन 11.59% सालाना return और करीब 6.83% volatility दिखाई।
इसके मुकाबले 75% Debt और 25% Equity वाले portfolio का average annual return 9.76% और volatility 7.09% रही। यानी study के इस उदाहरण में Gold को शामिल करने से return बेहतर रहा और volatility भी कम रही।
ध्यान रखें: ये ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित illustrative analysis है। इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी बिल्कुल यही return मिलेगा।
FY2026 में Gold ने Equity को कैसे पीछे छोड़ा?
रिपोर्ट में FY2026 का आंकड़ा खास तौर पर ध्यान खींचता है। इस अवधि में BSE Sensex TRI में 6.01% की गिरावट दर्ज हुई, जबकि MCX Gold ने 64.76% का रिटर्न दिया।
यही अंतर बताता है कि किसी एक asset class पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय portfolio को अलग-अलग assets में बांटना क्यों उपयोगी हो सकता है। हालांकि हर साल Gold का प्रदर्शन Equity से बेहतर नहीं रहता।
Gold और Equity के बीच क्या संबंध है?
WhiteOak study के अनुसार जनवरी 2010 से जुलाई 2026 तक के annual returns के आधार पर Indian Equity और Gold के बीच correlation -0.43 रहा। Negative correlation का सामान्य अर्थ यह है कि दोनों assets की चाल कई परिस्थितियों में एक-दूसरे से अलग रही।
इस तरह का संबंध diversification के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि अगर portfolio का एक हिस्सा कमजोर प्रदर्शन करता है तो दूसरा asset उस नुकसान के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है।
क्या हर निवेशक को 20% Gold रखना चाहिए?
यह कहना सही नहीं होगा कि हर निवेशक को अपने portfolio में ठीक 20% Gold रखना चाहिए। निवेश का सही allocation व्यक्ति की उम्र, financial goals, investment horizon, income, risk tolerance और मौजूदा portfolio पर निर्भर करता है।
WhiteOak की study में 20% Gold वाला allocation एक historical illustrative portfolio के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इसे किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत investment recommendation नहीं माना जाना चाहिए।
Gold ने हर साल अच्छा प्रदर्शन नहीं किया
Gold को लेकर एक आम धारणा है कि यह हमेशा अच्छा प्रदर्शन करता है, लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े ऐसा नहीं बताते। Study के अनुसार FY2014 में Gold में 3.20% की गिरावट और FY2015 में 8.34% की गिरावट आई थी। दूसरी तरफ उन्हीं वर्षों में domestic equities ने क्रमशः 20.73% और 26.81% का return दिया।
इससे साफ है कि Gold को Equity का replacement मानना सही नहीं है। इसकी भूमिका portfolio diversification में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
FY2020 में भी दिखा Gold का अलग प्रदर्शन
FY2020 में BSE Sensex TRI में 22.86% की गिरावट आई थी, जबकि MCX Gold ने 29.71% का return दिया। इसी तरह FY2016 में Sensex TRI 7.91% नीचे रहा, जबकि Gold ने 10.86% का return दिया।
ऐसे उदाहरण बताते हैं कि अलग-अलग asset classes का प्रदर्शन अलग-अलग market cycles में बदल सकता है। यही वजह है कि diversification को long-term portfolio strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
2011 से 2026 तक Gold का प्रदर्शन कैसा रहा?
WhiteOak Capital के अध्ययन में FY2011 से FYTD2027 तक की अवधि के लिए MCX Gold का CAGR करीब 14.19% बताया गया है। इसी अवधि में BSE Sensex TRI का CAGR 11.07% और CRISIL Short Term Bond Index का CAGR 7.60% रहा। S&P 500 TRI का INR में CAGR 19.55% रहा।
इन आंकड़ों से यह समझना जरूरी है कि किसी एक asset का लंबी अवधि का historical return देखकर भविष्य का return तय नहीं किया जा सकता। बाजार की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं।
Multi Asset Portfolio क्या होता है?
Multi asset portfolio में निवेश को एक से ज्यादा asset classes में बांटा जाता है। इसमें Equity, Debt, Gold और कुछ मामलों में अन्य assets भी शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य किसी एक asset पर पूरी तरह निर्भरता कम करना होता है।
उदाहरण के तौर पर Equity में तेज गिरावट आने पर Debt और Gold portfolio के दूसरे हिस्सों को संभालने में मदद कर सकते हैं। वहीं Equity के मजबूत प्रदर्शन के दौरान portfolio को growth का फायदा मिल सकता है।
Gold Investment के लिए क्या सीख मिलती है?
- Gold को केवल गहने खरीदने के नजरिए से देखना जरूरी नहीं है।
- Portfolio diversification में Gold की भूमिका हो सकती है।
- Gold और Equity हमेशा एक दिशा में नहीं चलते।
- अलग-अलग asset classes को मिलाने से portfolio volatility को manage करने में मदद मिल सकती है।
- हर साल Gold का return Equity से ज्यादा हो, यह जरूरी नहीं है।
- Historical return भविष्य के return की गारंटी नहीं है।
क्या Gold खरीदना अभी सही है?
यह सवाल हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है। केवल किसी एक साल के शानदार Gold return को देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेश से पहले अपने financial goal, risk profile और investment horizon को ध्यान में रखना चाहिए।
Gold में निवेश करने के अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं, लेकिन हर विकल्प में लागत, liquidity, taxation और risk अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी investment product को चुनने से पहले उसकी पूरी जानकारी समझना जरूरी है।
WhiteOak Capital Study का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
इस study का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि निवेश में हमेशा “सबसे ज्यादा return देने वाला asset” खोजने के बजाय ऐसा portfolio बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है जिसमें अलग-अलग assets का संतुलन हो।
Gold कुछ market downturns में portfolio को cushion दे सकता है, जबकि Equity long-term growth का अवसर प्रदान कर सकती है और Debt portfolio को अपेक्षाकृत स्थिरता देने में मदद कर सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
WhiteOak Capital की study में दिए गए historical portfolio आंकड़े किसी mutual fund scheme के भविष्य के return की गारंटी नहीं हैं। Historical performance भविष्य में दोहराई जाएगी, यह जरूरी नहीं है। किसी भी investment decision से पहले अपने risk profile और financial goals को ध्यान में रखना चाहिए।
निष्कर्ष
Gold Portfolio Downturn: WhiteOak Capital की नई study ने Gold को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। Gold केवल market uncertainty के समय सुरक्षित asset के तौर पर ही उपयोगी नहीं हो सकता, बल्कि Equity और Debt के साथ portfolio में शामिल होने पर diversification का फायदा भी दे सकता है।
FY2026 में जब Sensex TRI 6.01% नीचे रहा, उसी दौरान MCX Gold ने 64.76% का return दिया। हालांकि Gold हर साल बेहतर प्रदर्शन नहीं करता, इसलिए इसे Equity का विकल्प मानने के बजाय diversified portfolio के एक हिस्से के रूप में देखना ज्यादा उचित हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख निवेश संबंधी सामान्य जानकारी और उपलब्ध historical study पर आधारित है। इसे किसी व्यक्ति के लिए निवेश सलाह या किसी mutual fund, Gold product अथवा अन्य financial product को खरीदने की सिफारिश न माना जाए। निवेश से पहले अपने financial goals और risk profile के अनुसार योग्य financial adviser से सलाह लें।

















