8th Central Pay Commission: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला तीन सदस्यीय आयोग लगातार विभिन्न राज्यों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों के साथ परामर्श बैठकें कर रहा है। इसी बीच पिछले कुछ वर्षों में महंगाई भत्ते (DA) में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी को आधार बनाकर विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने नए वेतन आयोग में उच्च 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) लागू करने का जोरदार दबाव बनाया है।
डीए 60% पार: क्यों उठ रही है बड़े फिटमेंट फैक्टर की मांग?
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2023 में 46% रहा डीए जनवरी 2026 तक बढ़कर 60% के स्तर तक पहुंच गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि जिस तेजी से जीवन यापन की लागत बढ़ी है, उसे पाटने के लिए सामान्य वेतन वृद्धि नाकाफी साबित होगी।
फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला होता है, जिससे मौजूदा बेसिक पे को गुणा करके नया मूल वेतन तय किया जाता है। पिछले वेतन आयोगों के आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- 6th Pay Commission: 1.86 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था।
- 7th Pay Commission: 2.57 का मल्टीप्लायर तय किया गया था।
प्रमुख कर्मचारी संगठनों के अहम प्रस्ताव
8वें वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न महासंघों ने अपनी मांगें रखी हैं, जिनमें न्यूनतम वेतन में ठोस बढ़ोतरी की बात कही गई है:
- NC-JCM (स्टाफ साइड): नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 करने की मांग रखी है।
- भारत पेंशनर्स समाज: पेंशनभोगियों के इस संगठन ने भी 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की वकालत की है।
- मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): इन्होंने 3.61 मल्टीप्लायर की सिफारिश की है।
डीए मर्जर और स्थायी वेतन समीक्षा की मांग
सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) और पेंशनर्स संगठनों ने व्यवस्थागत बदलाव की मांग भी उठाई है। उनका सुझाव है कि जब भी डीए या डीआर 25% के पार जाए, उसे बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाए। इसके अलावा, एक 'परमानेंट वेज रिव्यू बॉडी' बनाने की पैरवी की गई है, ताकि हर 10 साल के इंतजार के बजाय समय-समय पर वेतन की समीक्षा हो सके।
कब तक आ सकती है अंतिम रिपोर्ट?
देशभर के प्रमुख केंद्रों में बैठकों का दौर पूरा होने के बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार करेगा। संभावना जताई जा रही है कि 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपी जा सकती है, जिसके बाद कैबिनेट की मंजूरी से नई वेतन संरचना प्रभावी होगी।
सूचना: प्रस्तुत विवरण विभिन्न कर्मचारी यूनियनों द्वारा आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों पर आधारित है। अंतिम वेतन संरचना आयोग की अधिकृत सिफारिशों और केंद्र सरकार के नीतिगत निर्णय के बाद ही तय होगी।
















