गुड़ी पड़वा के साथ ही चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी होगा। दक्षिण भारत के कई राज्यों में इसी तिथि को उगादी के रूप में मनाया जाता है। त्योहार की तैयारी कर रहे लोगों के लिए तारीख के साथ पूजा और घटस्थापना का स्थानीय मुहूर्त जानना भी जरूरी है।
Gudi Padwa 2027: 7 अप्रैल को मनेगा गुड़ी पड़वा, जानें पूजा मुहूर्त और नववर्ष का महत्व

मुख्य बिंदुQuick Read
- गुड़ी पड़वा 2027 की तारीख: बुधवार, 7 अप्रैल।
- पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।
- इसी दिन चैत्र नवरात्रि और उगादी की शुरुआत होगी।
- मध्य प्रदेश के इंदौर के लिए घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:14 से 7:26 बजे तक बताया गया है; दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है।
गुड़ी पड़वा 2027 कब है?
पंचांग के अनुसार, साल 2027 में गुड़ी पड़वा बुधवार, 7 अप्रैल को पड़ेगा। यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इसी तिथि से मराठी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की परंपराओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार अनुष्ठान के समय में अंतर हो सकता है।
गुड़ी पड़वा 2027 की तिथि और समय
- त्योहार: गुड़ी पड़वा
- तारीख: बुधवार, 7 अप्रैल 2027
- हिंदू तिथि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
- अन्य पर्व: चैत्र नवरात्रि और उगादी
उपलब्ध पंचांग गणनाओं में प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल की सुबह शुरू होकर 8 अप्रैल की सुबह तक बताई गई है। मिनटों में अंतर अलग-अलग पंचांगों में संभव है।
गुड़ी पड़वा पर पूजा का शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा के दिन सुबह गुड़ी स्थापित करने और पूजा करने की परंपरा है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना भी की जाती है। घटस्थापना का मुहूर्त शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के आधार पर तय होता है, इसलिए एक शहर का समय पूरे देश के लिए समान नहीं माना जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, उपलब्ध पंचांग में इंदौर के लिए 7 अप्रैल 2027 को घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:14 से 7:26 बजे तक दिया गया है। रीवा सहित अन्य शहरों के श्रद्धालु पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग में समय की पुष्टि करें।
घर पर कैसे करें गुड़ी स्थापना?
गुड़ी को विजय, शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के बाहर, खिड़की या बालकनी में ऐसी जगह लगाया जाता है जहां से यह दिखाई दे। सामान्य तौर पर गुड़ी स्थापना की विधि इस प्रकार है:
- सुबह स्नान करके साफ या पारंपरिक वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- एक लंबे बांस पर चमकीला रेशमी कपड़ा बांधें।
- नीम के पत्ते, आम के पत्ते, फूलों की माला और शक्कर की गांठों की माला सजाएं।
- बांस के शीर्ष पर तांबे, पीतल या चांदी का कलश उल्टा लगाएं।
- गुड़ी को स्थापित करके हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और धूप-दीप से पूजा करें।
परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार पूजा की सामग्री और विधि में बदलाव हो सकता है।
गुड़ी पड़वा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
गुड़ी पड़वा मराठी नववर्ष का प्रमुख पर्व है। परंपरा में गुड़ी को विजय और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसे घर पर फहराना नए वर्ष के स्वागत, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता की कामना से जुड़ा है।
कुछ धार्मिक मान्यताओं में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की शुरुआत से जोड़ा जाता है। भगवान राम की विजय और अयोध्या वापसी से जुड़ी कथाएं भी गुड़ी के प्रतीकात्मक अर्थ के साथ सुनाई जाती हैं। इन कथाओं को धार्मिक परंपराओं और लोकमान्यताओं के रूप में समझना चाहिए।
गुड़ी पड़वा पर क्या खाते हैं?
महाराष्ट्र में इस दिन नीम और गुड़ का मिश्रण खाने की परंपरा है। कड़वे और मीठे स्वाद को जीवन के सुख-दुख स्वीकार करने का प्रतीक माना जाता है। घरों में पूरन पोली, श्रीखंड-पूरी और अन्य पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं।
नीम या किसी अन्य सामग्री के सेवन से बीमारी ठीक होने अथवा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने जैसे चिकित्सकीय दावों को प्रमाणित स्वास्थ्य सलाह का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
गुड़ी पड़वा और उगादी में क्या अंतर है?
दोनों पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और नववर्ष की शुरुआत से जुड़े हैं। महाराष्ट्र और गोवा में इसे गुड़ी पड़वा या संबंधित स्थानीय नामों से मनाया जाता है, जबकि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी प्रमुख है। दोनों क्षेत्रों में पूजा, पारंपरिक भोजन और नववर्ष का स्वागत करने की अपनी-अपनी परंपराएं हैं।