रीवा शहर का कचरा जिस प्लांट में पहुंचता है, उसके आसपास रहने वाले ग्रामीण अब उसी कचरे से जुड़ी परेशानियों की शिकायत कर रहे हैं। रीवा के पहाड़िया क्षेत्र में कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों का आरोप है कि तेज दुर्गंध ने उनका रोजमर्रा का जीवन मुश्किल कर दिया है। ग्रामीणों का दावा है कि परेशानी का असर अब खेती और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। यहां तक कि शादी के रिश्तों में भी दिक्कत आने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ परिवार रिश्ता देखने के लिए गांव आते हैं, लेकिन दुर्गंध के कारण वापस लौट जाते हैं। हालांकि, शादी के रिश्तों पर पड़ रहे इस असर के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिर भी ग्रामीणों की शिकायत ने कचरा प्रबंधन और आसपास रहने वाले लोगों की जीवन स्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पहाड़िया कचरा प्लांट के आसपास बदबू से परेशान ग्रामीण
पहाड़िया में स्थापित कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट से शहर के कचरे के निस्तारण और बिजली उत्पादन की उम्मीद की गई थी। अब इसके आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाली तेज दुर्गंध के कारण घरों में रहना और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत का मुख्य केंद्र प्लांट के आसपास का वातावरण है। उनका कहना है कि बदबू केवल असुविधा नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में रहने की स्थिति को प्रभावित करने वाली समस्या बन गई है। ऐसे में प्लांट के संचालन, दुर्गंध के कारणों और उसे नियंत्रित करने के उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।
त्वचा संबंधी समस्याओं और स्वास्थ्य को लेकर चिंता
प्लांट के आसपास रहने वाले कुछ ग्रामीणों ने खुजली और त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायत की है। लोगों ने गंभीर बीमारियों के खतरे को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि, किसी खास बीमारी या कैंसर का प्लांट से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए चिकित्सकीय जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य जरूरी हैं।
इस मामले में स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण है। प्रभावित आबादी के स्वास्थ्य का आकलन और प्लांट के आसपास की पर्यावरणीय स्थिति की पड़ताल से यह समझने में मदद मिल सकती है कि शिकायतों के पीछे क्या कारण हैं। केवल आशंका के आधार पर किसी बीमारी का कारण तय नहीं किया जा सकता।
खेती और भूजल पर असर पड़ने का आरोप
ग्रामीणों ने कचरे से निकलने वाले दूषित तरल पदार्थ को लेकर भी चिंता जताई है। इस तरह के तरल को लीचेट कहा जाता है। लोगों का दावा है कि इससे आसपास की जमीन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और भूजल दूषित होने का खतरा है।
यदि दूषित तरल जमीन में रिसता है, तो मिट्टी और पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। लेकिन पहाड़िया क्षेत्र में वास्तव में ऐसी स्थिति है या नहीं, इसका पता मिट्टी और पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच से ही चलेगा। ग्रामीणों की शिकायतों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्तर पर पर्यावरणीय निगरानी और जांच की क्या व्यवस्था है।
खुले में पड़े अवशेषों को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने प्लांट के आसपास कचरा प्रसंस्करण के बाद बचे अवशेषों के खुले में पड़े होने की शिकायत भी की है। उनका आरोप है कि फ्लाई ऐश जैसे दिखने वाले पदार्थ आसपास खुले में पड़े रहते हैं और वहां बच्चे भी खेलते नजर आते हैं।
इन अवशेषों की वास्तविक प्रकृति और उनमें मौजूद संभावित हानिकारक तत्वों का पता जांच के बाद ही चल सकता है। यदि ऐसे पदार्थ खुले में पड़े हैं, तो उनके सुरक्षित भंडारण और निस्तारण के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दूसरे राज्यों से भी कचरा आने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट में रीवा के अलावा दूसरे राज्यों से भी कचरा लाया जाता है। मौके पर बिहार के पटना से कचरा लाने का दावा करने वाले एक ट्रक चालक से बातचीत का भी जिक्र सामने आया है। हालांकि, केवल चालक के दावे से कचरे के वास्तविक स्रोत, उसकी मात्रा या परिवहन की अनुमति की पूरी पुष्टि नहीं होती।
यह स्पष्ट करने के लिए कि कचरा कहां से लाया जा रहा है और किन शर्तों के तहत उसका परिवहन हो रहा है, संबंधित दस्तावेजों और प्लांट के रिकॉर्ड की जांच उपयोगी होगी। इससे कचरे के स्रोत और परिवहन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है।
नगर निगम कमिश्नर ने क्या कहा?
इस मामले पर नगर निगम कमिश्नर अक्षत जैन ने कहा है कि उन्हें प्लांट से दुर्गंध आने की शिकायत मिली है और इसे दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उनके मुताबिक, अन्य समस्याओं को लेकर उनके पास शिकायत नहीं आई है।
कमिश्नर के बयान के बाद दुर्गंध की समस्या पर सुधारात्मक कार्रवाई की बात सामने आई है। वहीं, ग्रामीणों ने खेती, भूजल, स्वास्थ्य और खुले में पड़े अवशेषों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन शिकायतों पर क्या जांच या कार्रवाई होती है, यह इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।
पहाड़िया के ग्रामीणों की शिकायत केवल बदबू तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इसका असर घरों में रहने, खेती और सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है। अब महत्वपूर्ण यह है कि दुर्गंध कम करने के उपायों के साथ अन्य शिकायतों की भी तथ्यात्मक जांच हो, ताकि प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों की चिंताओं का स्पष्ट जवाब मिल सके।