रीवा: राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के चौड़ीकरण के लिए चल रही भूमि अर्जन प्रक्रिया में भवन का उचित मूल्यांकन नहीं किए जाने का आरोप सामने आया है। रीवा तहसील हुजूर के ग्राम लोही निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी और गांव के अन्य रहवासियों ने इस संबंध में शिकायत की है। उनका कहना है कि भूमि अर्जन के दौरान तैयार मुआवजा सूची में केवल बाउंड्रीवाल का मूल्यांकन किया गया, जबकि मौके पर मौजूद मुख्य पक्के भवन को पूरी तरह छोड़ दिया गया। प्रभावित पक्ष ने दोबारा भौतिक सत्यापन कराकर संशोधित मुआवजा तय करने की मांग की है।
खसरा नंबर 229 की जमीन के मूल्यांकन पर उठाए सवाल
शिकायत में कृष्ण कुमार द्विवेदी पुत्र स्वर्गीय रसिक बिहारी द्विवेदी, निवासी ग्राम लोही की स्वामित्व वाली भूमि और उस पर निर्मित संरचना का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के चौड़ीकरण परियोजना के अंतर्गत उनकी खसरा नंबर 229 की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। इसका रकबा 2,400 वर्गफीट बताया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इस जमीन पर वर्ष 2017 से दो मंजिला पक्का आवासीय एवं व्यावसायिक भवन और बाउंड्रीवाल मौजूद है। इसके बावजूद अर्जन दल और मूल्यांकन दल द्वारा तैयार सूची अथवा अवार्ड में केवल बाउंड्रीवाल का मूल्यांकन कर मुआवजा तय किया गया। मुख्य पक्के भवन को मूल्यांकन से बाहर रखे जाने का आरोप लगाया गया है।
मुख्य भवन और प्रभावित हिस्से का मूल्यांकन नहीं होने की शिकायत
शिकायतकर्ता के मुताबिक, फोरलेन निर्माण के लिए की गई मार्किंग के दायरे में मुख्य भवन का करीब 10 फीट हिस्सा भी आ रहा है। उनका आरोप है कि भवन के प्रभावित हिस्से और उससे जुड़े शेष भाग का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
शिकायत में कहा गया है कि मौके पर मौजूद निर्माण का पूरा आकलन किए बिना मुआवजा तय करना उचित नहीं है। प्रभावित पक्ष ने भवन की वास्तविक स्थिति और निर्माण को ध्यान में रखते हुए दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग की है।
राजस्व और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम से दोबारा सर्वे की मांग
कृष्ण कुमार द्विवेदी ने मांग की है कि राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके साथ ही मार्किंग के दायरे में आ रहे 10 फीट मुख्य भवन और उससे प्रभावित होने वाले शेष हिस्से का उचित मूल्यांकन कराया जाए।
शिकायतकर्ता चाहते हैं कि नए मूल्यांकन के आधार पर संशोधित मुआवजा पत्रक तैयार किया जाए, ताकि अधिग्रहित भूमि और प्रभावित निर्माण का उचित मुआवजा निर्धारित हो सके।
मुआवजा तय होने तक ध्वस्तीकरण रोकने की अपील
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जब तक भवन का उचित मुआवजा निर्धारित नहीं हो जाता, तब तक ध्वस्तीकरण की किसी भी एकपक्षीय कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। प्रभावित पक्ष का कहना है कि पहले निर्माण का सही मूल्यांकन होना चाहिए और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल उपलब्ध शिकायत में मुख्य भवन का मूल्यांकन नहीं किए जाने और मुआवजा निर्धारण में त्रुटि होने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित भूमि अर्जन अधिकारियों और विभागीय पक्ष का जवाब उपलब्ध नहीं है। संयुक्त टीम द्वारा दोबारा सत्यापन और आधिकारिक जांच के बाद ही मूल्यांकन तथा मुआवजे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।