रीवा। ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण के नियमों में सुधार और सरलीकरण की मांग को लेकर 30 अक्टूबर 2026 को रीवा में सवर्ण क्रांति आंदोलन प्रस्तावित है। आंदोलन से जुड़े आयोजकों ने मध्य प्रदेश और रीवा के आसपास रहने वाले युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए लागू आरक्षण का लाभ लेने में जमीन, आय प्रमाण पत्र, उम्र सीमा और फीस जैसे मुद्दों पर कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं। इन्हीं नियमों में बदलाव की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है।
30 अक्टूबर को रीवा में जुटने की अपील
ईडब्ल्यूएस क्रांति आंदोलन के तहत देशभर में आरक्षण सुधार की मांग उठाए जाने का दावा किया जा रहा है। अब इस मुहिम के तहत रीवा में 30 अक्टूबर को कार्यक्रम प्रस्तावित है। आंदोलन से जुड़े एक वक्ता ने वीडियो जारी कर मध्य प्रदेश और रीवा के आसपास के युवाओं से इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
वक्ता का कहना है कि जब सरकार और विपक्ष उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तब अपने अधिकारों की आवाज उठाने के लिए आंदोलन जरूरी है। आयोजकों ने युवाओं से अपने बच्चों के भविष्य और आरक्षण नियमों में बदलाव की मांग को लेकर एकजुट होने का आह्वान किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रम के सटीक स्थल और समय का उल्लेख नहीं है।
EWS आरक्षण के नियमों को सरल बनाने की मांग
आंदोलन से जुड़े वक्ताओं ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पात्रता नियमों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कभी जमीन संबंधी शर्तों, कभी आय प्रमाण पत्र और कभी उम्र सीमा में छूट नहीं मिलने के कारण पात्रता का लाभ लेने में परेशानी होती है। आयोजकों की प्रमुख मांग है कि नियमों को सरल बनाया जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को इसका लाभ लेने में कठिनाई न हो।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि केवल आरक्षण का प्रावधान होने से उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि पात्रता और लाभ से जुड़े नियमों की व्यावहारिक समस्याओं को भी दूर करना जरूरी है। ये आंदोलन से जुड़े लोगों के आरोप और मांगें हैं। इन समस्याओं की व्यापकता और अलग-अलग नियमों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
सरकारी भर्ती फॉर्म की फीस पर भी उठाए सवाल
आंदोलन से जुड़े वक्ताओं ने सरकारी नौकरी के आवेदन फॉर्म की फीस को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को कई भर्तियों में सामान्य वर्ग के समान आवेदन शुल्क देना पड़ता है। आयोजकों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए इस व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
हालांकि, सरकारी भर्ती में आवेदन शुल्क के नियम संबंधित भर्ती एजेंसी और अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी भर्तियों में एक जैसी फीस होने का दावा करने से पहले संबंधित भर्ती के नियमों की जांच जरूरी है।
IIT की फीस और सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी
वक्ताओं ने आईआईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की फीस को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिलने के बावजूद फीस संबंधी नियमों में अपेक्षित राहत नहीं मिलती। इसी आधार पर आंदोलनकारी आरक्षण के साथ आर्थिक सहायता और संबंधित नियमों के सरलीकरण की मांग कर रहे हैं।
आईआईटी में फीस और छूट की पात्रता संस्थान तथा लागू नियमों पर निर्भर कर सकती है। इस विषय में किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक फीस और छूट संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।
उज्जैन से शुरू हुई मुहिम का रीवा तक पहुंचने का दावा
आंदोलन से जुड़े वक्ता के अनुसार, यह मुहिम उज्जैन से अनुराग प्रताप सिंह राघव के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। वक्ता ने रायपुर, छत्तीसगढ़ और छतरपुर में भी इस तरह के आयोजन होने की बात कही है। अब रीवा में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी बताई गई है।
आयोजकों का कहना है कि युवाओं को अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए। 30 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन में कितने लोग शामिल होंगे और प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्था रहेगी, इसकी पुष्टि कार्यक्रम के दिन की जानकारी से हो सकेगी।
आंदोलन की मांगों पर आगे क्या?
रीवा में प्रस्तावित आंदोलन का मुख्य मुद्दा ईडब्ल्यूएस आरक्षण के नियमों का सरलीकरण, पात्रता से जुड़ी समस्याओं पर पुनर्विचार और फीस संबंधी राहत की मांग है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी आयोजकों के बयान और अपील पर आधारित है। संबंधित सरकारी विभागों या प्रशासन की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। आंदोलन के बाद मांगों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।