नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को इस बार अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। सेल और डिस्काउंट ऑफर्स के बावजूद उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इस महंगाई की मुख्य वजह दुनिया भर में तेजी से बढ़ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों के लिए मेमोरी चिप की भारी मांग है।
सामान्य गैजेट्स के बजाय AI चिप्स को प्राथमिकता
सैमसंग और माइक्रोन जैसी प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनियां सामान्य स्मार्टफोन और लैपटॉप में लगने वाली पारंपरिक मेमोरी चिप्स के स्थान पर AI वर्कलोड में इस्तेमाल होने वाली प्रीमियम चिप्स के उत्पादन पर जोर दे रही हैं। इसके चलते उपभोक्ता गैजेट्स के लिए चिप की उपलब्धता सीमित हो गई है और इनपुट लागत बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, रुपये की कमजोरी ने आयातित कलपुर्जों के खर्च को और बढ़ा दिया है, जिससे भारत का टेक्नोलॉजी आयात बिल आयातित मात्रा की तुलना में 5 गुना तेजी से बढ़ा है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खुदरा महंगाई दर
वर्ष 2026 में जनवरी से सितंबर के बीच विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खुदरा महंगाई दर में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है:
| इलेक्ट्रॉनिक उपकरण | जनवरी 2026 (मुद्रास्फीति दर) | सितंबर 2026 (मुद्रास्फीति दर) |
|---|---|---|
| पेन ड्राइव एवं हार्ड डिस्क | 3.91% | 19.26% |
| कंप्यूटर, लैपटॉप और टैबलेट | -1.12% | 4.48% |
| मोबाइल और स्मार्टफोन | -2.31% | 5.82% |
| ऑडियो-विजुअल डिवाइसेज | -2.92% | 2.16% |
ब्रांड्स ने बढ़ाई कीमतें, बजट सेगमेंट पर अधिक मार
भारत में वर्ष 2026 की पहली छमाही में स्मार्टफोन की कीमतों में औसतन 16% की वृद्धि हुई है। सबसे तगड़ा असर ₹10,000 से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स पर पड़ा है, जिनके दाम औसतन 32% तक बढ़ गए हैं। प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने भी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं:
- एप्पल: पुराने आईफोन मॉडल्स की कीमतें 18% तक बढ़ी हैं; डिस्काउंट के बावजूद आईफोन 17 अपने लॉन्च मूल्य से ₹4,099 (5%) महंगा बिक रहा है।
- सैमसंग: कंपनी ने अपने दो प्रमुख मिड-रेंज स्मार्टफोन्स की कीमतों में 5% तक की बढ़ोतरी की है।
- चीनी स्मार्टफोन निर्माता: विभिन्न चीनी ब्रांड्स ने अपनी डिवाइसों के दामों में 13% तक की वृद्धि की है।
घरेलू उत्पादन और भविष्य का परिदृश्य
भारत में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, केन्स टेक्नोलॉजी और माइक्रोन के एटीसीएमपी (ATMP) प्लांट जैसी परियोजनाएं सेमीकंडक्टर निर्माण के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं का प्राथमिक ध्यान चिप असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग पर है, न कि कोर मेमोरी फैब्रिकेशन पर। ताइवान की शोध फर्म ट्रेंडफोर्स का अनुमान है कि मेमोरी चिप की कीमतें वर्ष 2027 के अंत तक ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, जिससे निकट भविष्य में आम उपभोक्ताओं को कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद कम है।

