मऊगंज

मऊगंज में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर भारी जुर्माना; कलेक्टर ने आदेश जारी किया

मऊगंज में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर भारी जुर्माना; कलेक्टर ने आदेश जारी किया
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मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने जिले में नरवाई जलाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला किसानों को भूसा उपलब्ध कराने और गर्मियों में आग की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मऊगंज में नरवाई दहन पर कलेक्टर का सख्त आदेश: मऊगंज जिले के कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय कुमार जैन ने किसानों और पशुपालकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने पूरे मऊगंज जिले में रबी फसलों की कटाई के बाद नरवाई (फसल अवशेष) जलाने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और इसका उद्देश्य जिले में भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा ग्रीष्मकाल में होने वाली आग की दुर्घटनाओं को नियंत्रित करना है।

नरवाई जलाने पर लगेगा भारी जुर्माना, होगी कानूनी कार्रवाई

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन कर यदि कोई किसान नरवाई जलाता हुआ पाया जाता है, तो उस पर कठोर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने की राशि भूमि के आकार के अनुसार निर्धारित की गई है। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों पर 2500 रुपये, दो से पाँच एकड़ तक के किसानों पर 5000 रुपये और पाँच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ऐसे किसानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा और दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्तिगत रूप से सभी किसानों तक आदेश पहुंचाना संभव नहीं है, इसलिए भारतीय नागरिक संहिता 2023 की धारा 163 (2) के तहत यह आदेश एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है और विभिन्न संचार माध्यमों से इसकी सूचना आम जनता तक पहुंचाई जा रही है।

हार्वेस्टर में स्ट्रारीपर अनिवार्य, अवशेष प्रबंधन पर जोर

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हार्वेस्टर के माध्यम से गेहूं की कटाई करने पर उसमें स्ट्रारीपर लगाना अनिवार्य होगा। जिन हार्वेस्टरों में फसल अवशेष प्रबंधन प्रणाली (Residue Management System) नहीं होगी, उन्हें गेहूं काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिले में संचालित सभी कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रारीपर का उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिला परिवहन अधिकारी को सौंपी गई है और उन्हें उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

नरवाई जलाने के नुकसान और वैकल्पिक उपयोग

कलेक्टर ने नरवाई जलाने के पर्यावरणीय और कृषि संबंधी नुकसानों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि खेत में नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद कई लाभदायक सूक्ष्मजीव और जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी कठोर हो जाती है और उसकी जल धारण क्षमता कम हो जाती है। इसलिए नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि नरवाई जलाने के स्थान पर उसे स्ट्रारीपर से भूसा बनाकर पशुओं के भोजन के रूप में उपयोग करें। इसके अतिरिक्त, गेहूं की कटाई के बाद यदि किसान कोई अन्य फसल लेना चाहते हैं, तो वे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे नरवाई मिट्टी में मिलकर खाद का काम करेगी और फसल के लिए पोषण प्रदान करेगी। नरवाई को बेलर, रैकर और चापर मशीन की सहायता से बंडल बनाकर औद्योगिक ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पर्यावरण नियमों का पालन अनिवार्य

जारी आदेश में पर्यावरण विभाग द्वारा 2017 में जारी नोटिफिकेशन का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें नरवाई जलाने पर दंड का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी फसल अवशेष या नरवाई को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

निगरानी समितियां गठित, अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई

आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। साथ ही, सभी अनुभागों में एसडीएम की अध्यक्षता में निगरानी समितियां बनाई गई हैं। खंड स्तर पर नायब तहसीलदार, कृषि विस्तार अधिकारी और थाना प्रभारी को आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला दण्डाधिकारी ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पटवारी के साथ नरवाई जलाने की घटनाओं का प्रतिवेदन तैयार कर तहसीलदार को भेजने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार नरवाई जलाने वाले किसानों की सुनवाई कर एसडीएम के माध्यम से अंतिम निराकरण के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक और सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी (राजस्व), तहसीलदार और कृषि विभाग के संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है।

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