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एमपी भोपाल की बेटी का हौंसला डेंगू भी नहीं कर सका पराजित, प्रतियोगिता में जीता गोल्ड
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कहते हैं कि जहां चाह होती है वहां राह निकालनी आसान हो जाती है। भोपाल की एक 10 वर्षीय बेटी का हौंसला डेंगू बीमारी भी नहीं डिगा पाई। अस्पताल से एक दिन पहले उनकी छुट्टी हुई और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में अपना दम दिखाया। जहां बेटी ने स्वर्ण पदक जीतकर शहर व प्रदेश का नाम रोशन किया।
चैम्पियनशिप के 10 दिन पूर्व बिगड़ी तबियत
राजधानी भोपाल की दीक्षा सिंह गुरुंग को जयपुर में आयोजित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय कराते चैम्पियनशिप में हिस्सा लेना था। इसके दस पूर्व ही उनको डेंगू हो गया। जिससे उनके प्लेटलेट्स तेजी से गिर गए। इस दौरान चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह देते हुए अस्पताल में भर्ती कर लिया। दीक्षा द्वारा चैम्पियनशिप की तैयारी लगभग छह माह पूर्व से की जा रही थी। यह उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था किंतु बीमारी भी उनके हौंसले के उड़ान को नहीं रोक पाई। लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उनके द्वारा चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया गया।
कुमिते में जीता स्वर्ण पदक
दीक्षा ने टूर्नामेंट के लिए रवाना होने से ठीक एक दिन पहले तक अपने स्वास्थ्य में सुधार करते हुए अस्पताल से छुट्टी करवाई। जिसके बाद वह अपने टीम के साथ जयपुर के लिए रवाना हुईं। अंतर्राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में दीक्षा ने अपना हुनर दिखाते हुए न केवल कुमिते में स्वर्ण पदक झटका बल्कि शहर और प्रदेश का भी नाम भी रोशन किया। इस दौरान दीक्षा ने बताया कि उसे कमजोरी तो बहुत महसूस हो रही थी किन्तु कोच की बेहतर ट्रेनिंग की बदौलत उनकी राह आसान हो गई। दीक्षा द्वारा इसके पूर्व भी भोपाल में आयोजित जिला कराते स्पर्धा 2022 व पचमढ़ी में आयोजित राज्य स्तरीय कराते स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता गया है। वहीं दीक्षा के पापा की मानें तो उसे डेंगू होने के बाद उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी कि वह इस चैम्पियनशिप में हिस्सा ले पाएंगी। किन्तु उनकी बेटी ने हौंसला नहीं खोया और चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।